जिले के कलेक्टर के तबादले की सूचना मिली थी फिर दूसरे दिन पता चला कि 28 अगस्त 2016 को लोहिया भवन में विदाई समारोह का आयोजन किया गया था और उसी दरम्यान खबर मिली कि डी.एम. का ‘ट्रान्सफर’ रूक गया। लोगों में बड़ा कौतूहल देखा गया। कलेक्टर के कई खासमखास ने फेसबुक पर अपनी फोटो के साथ (कलेक्टर के साथ) प्रसन्न मुद्रा में लिखा कि हम जाने नही देंगे। यह देखकर सोचने पर मजबूर होना पड़ा और मुझे वर्षों पूर्व पहले कलेक्टर से लेकर वर्तमान तक के तबादले याद आने लगे।
मित्रों! सरकारी नौकरी में ‘तबादला’ होना कोई असंवैधानिक प्रक्रिया नहीं होती है। हमारे यहाँ के कलेक्टर युवा आई.ए.एस. हैं- इनको अभी दो दशक से ऊपर की अवधि तक विभिन्न पदों पर रहकर अपनी सेवाएँ देना है। इस अवधि में परिपक्वता और अनुभव भी प्राप्त होंगे, कलेक्टर से भी ऊँचे पदों पर रहकर अपनी सेवाएँ देनी होंगी। यदि तबादला एक अहम मुद्दा बना लिया जाए तब बात ही दीगर है।
कलेक्टर का तबादला रूकना इसे सहज लिया जा सकता है, परन्तु यदि ‘कलेक्टर’ के चहेते इसे ‘मुद्दा’ बनाकर उनके तबादले को रूकवाने में अपनी जीत मान रहे हैं तो अवश्य ही कहा जा सकता है कि महत्वाकाँक्षी लोगों के कथित हितैषियों को इस पर गर्व होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि ‘कलेक्टर’ इसी जिले में रहकर अपनी पूरी सरकारी सेवा अवधि बिताएँगे। आज नहीं तो कल अवश्य ही इन्हें यहाँ से जाना होगा तब हो सकता है कि हालात परिस्थितियाँ कुछ और हो जाएँ जिसके चलते विवेक आई.ए.एस. को उतना सम्मान/आदर न मिल सके, जितना अब तक मिला है। मेरी शुभकामना। लिखते-लिखते पता चला कि आई.ए.एस. विवेक का हैप्पी बर्थडे भी आज ही यानि 29 अगस्त को है। मेरी तरफ से आपको जन्मदिन की ढेरों बधाई और मंगल कामनाएँ।








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