अम्बेडकरनगर जिले में ढाई वर्ष तक कलेक्टर के पद पर रहने वाले युवा आई.ए.एस. विवेक के तबादले को लेकर उनके चाहने वालों में खुशी इस बात की थी कि ऐन विदाई समारोह आयोजन के वक्त उ.प्र. शासन का संशोधित आदेश आया कि उनका तबादला रूक गया है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था। विवेक ने अपनी नई पोस्टिंग को सहर्ष स्वीकारा और कानपुर जाकर ज्वाइन भी कर लिया।
यथा नामे तथा गुणे को चरितार्थ करते हुए आई.ए.एस. विवेक जिन्हें अभी दो दशक से कुछ अधिक की सरकारी सेवा करनी है ने अपने विवेक का सही इस्तेमाल किया। उनका तबादला रूकने पर खुशी मनाने वाले करीबीजन भले ही निराश हुए हों परन्तु आई.ए.एस. विवेक ने जिले के कलेक्टर पद का लोभ त्यागकर कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद को स्वीकार कर ही लिया।
सरकारी नौकरी में तबादले/पोस्टिंग तो होते ही रहेंगे यदि पद खास पर माया-मोह के वशीभूत एक आई.ए.एस. इसे सहज रूप में न स्वीकारे तब बात शोचनीय हो जाती है। अपना तो यह मानना है कि अंगद का पाँव बना रहना किसी भी उच्चाधिकारी के लिए शोभा नहीं देता है, यह तब जबकि उसका तबादला हो जाए और वह अपने चाहने वाले कथित शुभचिन्तकों, सत्तापक्षीय लोगों की वजह से एक ही स्थान पर जमा रहे। ज्यादा न कहकर बस इतना ही कहूँगा कि विवेक ने अपने तबादले को सहज स्वीकार कर एक स्वयं को एक अत्यन्त सुलझे हुए अधिकारी की तरह प्रस्तुत किया है।
यथा नामे तथा गुणे को चरितार्थ करते हुए आई.ए.एस. विवेक जिन्हें अभी दो दशक से कुछ अधिक की सरकारी सेवा करनी है ने अपने विवेक का सही इस्तेमाल किया। उनका तबादला रूकने पर खुशी मनाने वाले करीबीजन भले ही निराश हुए हों परन्तु आई.ए.एस. विवेक ने जिले के कलेक्टर पद का लोभ त्यागकर कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद को स्वीकार कर ही लिया।
सरकारी नौकरी में तबादले/पोस्टिंग तो होते ही रहेंगे यदि पद खास पर माया-मोह के वशीभूत एक आई.ए.एस. इसे सहज रूप में न स्वीकारे तब बात शोचनीय हो जाती है। अपना तो यह मानना है कि अंगद का पाँव बना रहना किसी भी उच्चाधिकारी के लिए शोभा नहीं देता है, यह तब जबकि उसका तबादला हो जाए और वह अपने चाहने वाले कथित शुभचिन्तकों, सत्तापक्षीय लोगों की वजह से एक ही स्थान पर जमा रहे। ज्यादा न कहकर बस इतना ही कहूँगा कि विवेक ने अपने तबादले को सहज स्वीकार कर एक स्वयं को एक अत्यन्त सुलझे हुए अधिकारी की तरह प्रस्तुत किया है।








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