गौड़ साहब एक रहस्यमयी सख्शियत

आधी रात को जब गौड़ जी ने घर का दरवाजा खोलने के लिए अपनी धरमपत्नी का नाम लेकर पुकारा तब मेरा भी ध्यान उधर चला गया था। गौड़ जी एक हफ्ते बाहर थे जाहिर सी बात है जब बाल-बच्चेदार व्यक्ति बाहर रहेगा तब उसकी पत्नी और बच्चों के मन में रहता ही होगा कि जब वह लौटेगा तब उन सबकी जरूरतों को पूरा करने के लिए धन (पैसा) लेकर आएगा।
बच्चे अबोध होते हैं। गौड़ साहब के भी बच्चे तो अभी किशोर उम्र के हैं और पत्नी गृहणी। उन्हें पता ही नहीं कि गौड़ साहेब क्या करते हैं। गौड़ साहेब को मैं उनके बचपन से जानता हूँ। उन्होंने क्या काम किया है- यह तो मुझे भी नहीं मालूम। आजकल गौड़ साहब क्या कर रहे हैं यह भी नही ज्ञात है। अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं इसीलिए बच्चे और उनकी पत्नी खुश रहते हैं।
गौड़ साहेब ने कोई स्थाई काम नहीं किया है। उम्र भी काफी हो चली है। उनके काम धन्धे के बारे में कौन पूँछे कि भइया आप करते क्या हो? सुना है कि वह काफी ‘बिजी’ आदमी हैं और तब ऐसा व्यक्ति अवश्य ही पैसा कमाता होगा।
कभी-कभार मेरे मिलने वाले पूँछते हैं कि गौड़ साहब क्या करते हैं- तब स्पष्ट रूप से कहना पड़ता है कि इसे शायद गौड़ साहब भी नहीं जानते। खैर गौड़ साहब घर पहुँच गए हैं। बच्चों-पत्नी के चेहरे खिले हैं। देखना है कि अब फिर कब पैसा कमाने निकलेंगे। इधर उनकी अनुपस्थिति में काफी शान्ति थी। देखना यह है कि कल से कैसा माहौल बनता है। पत्नी की जरूरत पूरी करने में कोताही बरतने पर प्रायः चिक-चिक होती है जिसे हर कोई सुन सकता है।
गौड़ साहब ऐसे व्यक्ति हैं जिन पर यदि किसी अच्छे विद्वान द्वारा लिखा जाए तो कई मोटे-मोटे ग्रन्थ तैयार हो सकते हैं। धारा प्रवाह झूठ बोलने वाले गौड़ साहेब की तो आधी जिन्दगी कट गई लेकिन उनका क्या होगा जो उनके आश्रित और पाल्य हैं। खैर! यह गौड़ सर की प्रॉब्लम है इस पर ज्यादा सोच-विचार करना मूर्खता है। 

-भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी

9454908400

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