वोए गुलशन नन्दा- लिखूँ मैं और नाम तुम्हारा छपे। यह अब हरगिज नहीं होगा। बहुत हो गया यार तुमने मेरा शोषण किया। 40 साल से ऊपर हो गया मैंने तुम्हारे लिए लिखा मुझे क्या मिला या तुमने उसके एवज में क्या दिया है मुझे......? इस सवाल का जवाब है तुम्हारे पास- शायद नहीं?
मुझमें और तुममें अन्तर बस इतना था कि तुम प्रिण्ट के सम्पादक थे और मैं पत्रकार। तुमने एक आई कार्ड पकड़ा दिया था जिसे पाकर मुझे लगा था कि बहुत कुछ मिल गया है। तुमने खूब मनमानी किया और सम्पादक की हैसियत से मुझे हुक्म देते रहे। दिल पर हाथ रखकर सोचो कभी तुमने मेरे बारे में भी सोचा।
बिल्कुल नहीं- तुम तो एक तानाशाह की तरह अपनी तानाशाही से मुझ जैसे पत्रकार से अपना काम करवाते रहे। तुम्हारे इस शोषण से मैं एलास्टिक से प्लास्टिक बन गया और टूट गया- मैंने तुम्हारे जैसे सम्पादक का साथ छोड़ ही दिया क्योंकि मुझे पत्रकार परिचय पत्र नहीं पैसों की दरकार थी।
तुम्हारा साथ छोड़ने के बाद मैने स्वतंत्र लेखन शुरू कर दिया और एक दशक से वेब मीडिया से जुड़कर लेखन कार्य करके आत्मतुष्टि पा रहा हूँ। मुझे अब काफी सुकून है क्योंकि तुम्हारे जैसे घटिया सोच वाले हृदयहीन कथित सम्पादक से मेरा पिण्ड छूट गया। बताना चाहूँगा कि अब मैं काफी मजे में हूँ यह बात और हो सकती है कि पैसे के मामले में तुम आगे हो लेकिन चैन नहीं होगा जबकि मैं चैन से सोता हूँ।
मुझमें और तुममें अन्तर बस इतना था कि तुम प्रिण्ट के सम्पादक थे और मैं पत्रकार। तुमने एक आई कार्ड पकड़ा दिया था जिसे पाकर मुझे लगा था कि बहुत कुछ मिल गया है। तुमने खूब मनमानी किया और सम्पादक की हैसियत से मुझे हुक्म देते रहे। दिल पर हाथ रखकर सोचो कभी तुमने मेरे बारे में भी सोचा।
बिल्कुल नहीं- तुम तो एक तानाशाह की तरह अपनी तानाशाही से मुझ जैसे पत्रकार से अपना काम करवाते रहे। तुम्हारे इस शोषण से मैं एलास्टिक से प्लास्टिक बन गया और टूट गया- मैंने तुम्हारे जैसे सम्पादक का साथ छोड़ ही दिया क्योंकि मुझे पत्रकार परिचय पत्र नहीं पैसों की दरकार थी।
तुम्हारा साथ छोड़ने के बाद मैने स्वतंत्र लेखन शुरू कर दिया और एक दशक से वेब मीडिया से जुड़कर लेखन कार्य करके आत्मतुष्टि पा रहा हूँ। मुझे अब काफी सुकून है क्योंकि तुम्हारे जैसे घटिया सोच वाले हृदयहीन कथित सम्पादक से मेरा पिण्ड छूट गया। बताना चाहूँगा कि अब मैं काफी मजे में हूँ यह बात और हो सकती है कि पैसे के मामले में तुम आगे हो लेकिन चैन नहीं होगा जबकि मैं चैन से सोता हूँ।







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