डॉ. अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस: दिक्कतों की भरमार, मिली गालियाँ....

-भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी/ सुनता रहा कि प्रचार पाने की तमन्ना रखने वाले एफ.बी. एकाउण्ट खोलते हैं। कोई मार्क जुकरवर्ग नामक इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर रहा है उसी ने यह सुविधा फ्री में मुहैय्या कराया है। एक बात समझ में नहीं आ रह है- वह यह कि फ्री शब्द का अर्थ शायद एफ.बी. एकाउण्ट होल्डर्स को नहीं मालूम, यदि ऐसा होता तो एफ.बी. पर हर कोई न दिखता। भइया/बहनों यह इन्टरनेट से संचालित होता है और इसके लिए मोबाइल सेट्स (सिम) और लैप, डेस्क टॉप पर नेट पैक लेना पड़ता है। नेटपैक की कीमत चुकानी पड़ती है। तब भला बताइए कि यह फ्री कहाँ से हुआ?
बहरहाल! मुझे तो अपनी शोहरत प्यारी है, इसलिए इसे बुलन्दियों पर ले जाने के लिए मैंने भी एफ.बी. एकाउण्ट खोल लिया। ज्यादा तकनीकी ज्ञान नहीं है- बस इतना जानता हूँ कि वाहवाही चाहने वालों के लिए फेसबुक से अच्छा कोई दूसरा माध्यम नहीं। मित्र बनाओ- अपनी फोटो लगावो- उनकी फोटो लाइक करो जाहिर सी बात है कि वे भी आप को लाइक करेंगे। यदि मेरी तरह जानकारी का अभाव हो तो कृपा कर धन और समय न बरबाद करें। ज्यादा ज्ञान बघारने की गलती करने वाले परेशान ही रहते हैं। खैर! मित्रों (जो भी हैं संख्या में) आज मेरी तस्वीर देखें- जी नहीं मेरे द्वारा अपलोड की गई फोटो देखें और आलेख पढ़ें। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप लोग मेरा यह आलेख पढ़कर अपने लाइक्स और कमेन्ट्स जरूर देंगे।
मैं आज दुःखी हूँ और मेरे दुःखी होने के एक-दो नहीं कई कारण हैं। दुःखी होने के कारणों में पहला है- तमिलनाडु एआईडीएमके की प्रमुख और वहाँ की सी.एम. (अम्मा) जयललिता के निधन की खबर। मैं अम्मा का फैन हूँ। मैंने अपनी युवावस्था (1968) में उनकी एक मात्र हिन्दी फिल्म ‘इज्जत’ देखी थी। धर्मेन्द्र, तनुजा के साथ जयललिता ने अभिनय किया था। कालान्तर में सिनेमा जगत का परित्याग कर जयललिता ने राजनीति में प्रवेश किया और विश्व की महान प्रभावशाली महिला नेत्रियों में अपना नाम शुमार कराया। तात्पर्य यह कि फिल्मी ग्लैमर से लेकर राजनीति के क्षेत्र में हर किसी ने उनकी काबिलियत का लोहा माना। मैं स्वर्गीया ‘अम्मा’ (जयललिता) के निधन पर शोक व्यक्त करता हूँ और श्रद्धाँजलि अर्पित करता हूँ। दूसरा कारण- आज ही 6 दिसम्बर को भारत के संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर का परिनिर्वाण दिवस था, जाहिर सी बात है कि मैं एक शिक्षित नागरिक की तरह उनकी डेथ एनिवर्सिरी मनाने में व्यस्त था। हालाँकि मेरा एक दोस्त जो अनपढ़ है उसने फोन करके मुझे बताया था कि भइया आज बाबा साहेब का मरनदिन है, उनकी मूर्ति पर हम घर भर साफ-सफाई उपरान्त फूल-माला चढ़ा रहे हैं।
उसकी सीधी-सादी बात सुनकर आनन्द मिला था। मैंने भी अपने तरीके से संविधान निर्माता/दलितों के मसीहा को उनके परिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धाँजलि अर्पित किया था। तीसरा कारण- जब लिख रहा हूँ तो बता ही दूँ कि यह कौन सा था। हमारी दलित/मलिन बस्ती (स्लम) की विद्युत आपूर्ति हेतु बिजली महकमें के जे.ई. द्वारा खम्भा खड़ा कराया जा रहा था और पूरे दिन बिजली से महरूम हम लोग हलकान रहे। बिजली घर के नियंत्रण कक्ष से फोन द्वारा पूँछने पर एस.एस.ओ. आन ड्यूटी द्वारा डॉ. अम्बेडकर को गालियाँ दी गई और पूँछने वाले के साथ अभद्रता।
पता चला कि एस.एस.ओ. आन ड्यूटी का सी.यू.जी. मोबाइल नम्बर हाइडिल के किसी दारूबाज कर्मचारी के हाथों में था उसने अपनी आदत अनुसार गालियाँ देना शुरू किया था। डॉ. अम्बेडकर का नाम आते ही वह भड़क उठा और अश्लील शब्दों का प्रयोग करके एकदम से अचंभित कर दिया। जे.ई./एस.डी.ओ. ने फोन कॉल रिसीव ही नहीं किया था। देर शाम पता चला कि डॉ. अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर ही दलित बस्ती (स्लम) को विद्युत आपूर्ति किए जाने के लिए खम्भा गड़वाया जा रहा था। चूँकि जे.ई. एक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की जाति का है- इसलिए उसे डॉ. अम्बेडकर से लगाव नहीं यही हालत एस.डी.ओ. हाइडिल की है- वह प्रदेश सरकार के मुखिया की जाति के हैं। डॉ. अम्बेडकर के घोर विरोधी इन दोनों ने डॉ. साहेब के परिनिर्वाण दिवस पर हम दलितों के साथ योजनाबद्ध तरीके से अच्छा मजाक किया था। पूरा दिन तो जे.ई./एस.डी.ओ. खम्भा गाड़ने में खा गए। शाम को पनकी कन्ट्रोल ने आपातकालीन कटौती कर दिया। कुल मिलाकर 6 दिसम्बर का दिन और 6/7 की रात बिजली महकमे द्वारा दी गई पीड़ा भोगने में बीता। 6 दिसम्बर के दिन मात्र एक घण्टे बिजली पाने पर शक्तिभवन, पनकी कन्ट्रोल और यू.पी.पी.सी.एल. के क्लिप आर्ट पर पुष्पाँजलि अर्पित किया था।
चौथा कारण- थोड़ा पढ़ ही लीजिए। वह यह कि बिजली विभाग में तैनात एक नवयुवक जे.ई. ने विद्युत उपकेन्द्र के एस.एस.ओ. का सी.यू.जी. नम्बर एक शराबी को देकर यह हिदायत दिया था कि जब कोई पत्रकार बिजली की अघोषित कटौती के बारे में पूँछे तो गालियाँ देना। इसी क्रम में एक महिला पत्रकार ने जब बिजली आपूर्ति के बारे में जानकारी माँगा तब उक्त शराबी विद्युत कर्मी ने पूँछा कौन बोल रही हो- जब महिला पत्रकार ने बताया कि वह अमुक है और पत्रकार हैं तो वह शुरू हो गया संविधान निर्माता को अपशब्द कहा और महिला पत्रकार से दूरभाषीय वार्ता में अश्लील शब्दों का प्रयोग कर इतना सब कह डाल जिसे सुनकर महिला पत्रकार स्तब्ध रह गई और फोन कट करके उसने ऊँचे पदों पर तैनात अभियन्ताओं से शिकायत किया। यह अप्रत्याशित मामला मेरे संज्ञान में आया तब मैं चुप्पी मारकर उन दोनों जे.ई. और शराबी विद्युत कर्मी के बारे में सोचता हुआ ऊपर वाले से मन ही मन उन्हें सद्बुद्धि देने की कामना किया था।
पाँचवा कारण- रात के 11 बजे हाइडिल कन्ट्रोल से फोन कॉल द्वारा पूँछा कि जनाब बिजली मिलेगी कि नहीं तो स्पष्ट जवाब मिला कि ‘मेन सप्लाई’ कटी है, किसी को पता नहीं कि कब आएगी- जब आएगी तब मिलेगी सो जावो ठण्ड है रजाई ओढ़ लो। ढिबरी जलाकर लिखने के लिए कलम-कागज लेकर बैठ गया- उसी का परिणाम यह पीड़ा है। सर्दी की रात में रजाई ओढ़कर लिखने में परेशानी हो रही थी सोचा अब आज बस इतना ही-। इसलिए कलम और कागज रख दिया। रजाई में मुँह ढक कर सो गया था। बाद में कुछ लोगों से पता चला कि 1 बजे रात को बिजली बहाल हुई।
मेरे दुःख के कुछ कारण और भी हैं मैं चाहता हूँ कि उन्हें भी लिखकर आप लोगों से शेयर करके मन हल्का कर लूँ। बीएसएनएल की ब्रॉड बैण्ड (इन्टरनेट) सेवा 6 दिसम्बर 16 को फेल हो गई। ऐसे में मुझ जैसे ग्राहक को कितना परेशानी हुई होगी। इसका अन्दाजा वे आसानी से लगा सकते हैं जो बीएसएनएल की ब्राडबैण्ड इन्टरनेट सेवा पर निर्भर हैं। कितना अजीब संयोग है कि आम आदमी के लिए सरकारी/अर्धसरकारी सुविधा वाली सेवाएँ डा. अम्बेडकर साहेब के परिनिर्वाण दिवस पर ही फेल होनी थी या किसी साजिश के तहत गरीबों के मसीहा की पुण्यतिथि पर व्यवधान डाला गया।
भारत जैसे देश में जिसका संविधान डॉ. अम्बेडकर ने निर्मित किया उसके अनुयायियों और स्वयं उसके साथ भेदभाव बरता जा रहा है। डॉ. अम्बेडकर का विरोध करने वाले लोग वाकई दलित विरोधी हैं। दलित होना अभिशाप है- बस प्रतीक्षा कीजिए उन दिनों का जब लोकतंत्रीय प्रणाली से संचालित देश के कुछेक प्रदेशों में चुनाव होंगे तब डॉ. अम्बेडकर विरोधी लोगों को उनकी औकात पता लगेगी। बावजूद कई दिक्कतों के मैने डॉ. अम्बेडकर को श्रद्धाँजलि दिया था।
मित्रों! मेरी एक आशंका निर्मूल साबित हुई जिससे मुझे काफी हद तक सुकून मिला, और प्रतीत हुआ कि देश में अभी भी आपसी सौहार्द कायम है। वह आशंका क्या है इसको भी बताना जरूरी है। तो सुनिए मेरी आशंका थी अयोध्या स्थित विवादित ढांचे का ध्वस्तीकरण जो 6 दिसम्बर को ही हुआ था और तब से आज तक आतंकी घटनाओं की आशंका को लेकर हर जागरूक एवं आम-खास हलकान रहा करता है। धन्य हैं हम और हमारे हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई जो आपस में हैं भाई-भाई। सभी ने साबित कर दिया कि देश में आपसी सौहार्द्र कायम है। बस इसी के साथ, जय हिन्द। 

-भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी

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