मित्रों! बीते विस चुनाव-2017 के परिणाम आने पर मोदी की सुनामी में अच्छे-अच्छे बह गये मतलब यह कि उत्तर प्रदेश जैसे सूबे में भाजपा 300 का आंकड़ा पार कर प्रचण्ड बहुमत हासिल करने में कामयाब रही। चुनाव की प्रक्रिया के शुरूआती दौर से लेकर अब तक बहुतेरे जानकार इस कदर अपनी बातें इन्टरनेट के जरिए सोशल साइट्स पर पोस्ट कर रहे हैं जिन्हें पढ़कर अपना ही सिर पीट लेने को मन करता है। उदाहरण के तौर पर- योगी की सरकार बनी और उनके साथ दो उप मुख्यमंत्रियों ने शपथ ग्रहण किया यह बात 19 मार्च 2017 की है।
उसी रात में सोशल साइट्स पर पढ़ने को मिला किया डॉ. दिनेश शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और गृह मंत्रालय को लेकर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य में ठन गई है। यही नहीं कई विद्वान, राजनीति के जानकार और पत्रकारिता में महारत हासिल किए हुए महानुभावों ने तो यहाँ तक कह दिया कि उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद को उनके पद से हटा दिया गया। एक ने इस पोस्ट पर जवाब के रूप में वरिष्ठ आई.पी.एस. रजनीकान्त मिश्र की फोटो तक अपलोड कर दी। यह तो रही 19 और 20 मार्च के बीच उड़े तमाम महाज्ञानियों के शिगूफों की बात अब इस समय सोशल मीडिया पर इन्हीं और इन जैसे लोगों द्वारा कहीं सलाटर हाउस बन्दी तो कहीं एन्टी रोमियो स्क्वॉयड को लेकर तरह-तरह की भ्रामक खबरें पोस्ट की जा रही हैं।
मेरा अपना मानना है कि इस तरह के काम को अन्जाम देने वाले थोड़ा सब्र करें और उत्तर प्रदेश में बनी प्रचण्ड बहुमत की लोकप्रिय सरकार को थोड़ा समय दें। फिजूल की भ्रामक सूचनाएँ देकर किसी भी तरह की सनसनी न फैलाएँ। सबका साथ, सबका विकास का नारा देने वाली सरकार जब अपने वादे पर खरा न उतरे तब उसका विरोध करें और उनके इस कार्य में सहभागी के रूप में मुझ जैसे तमाम लोग भी शामिल होंगे। वर्तमान सरकार के गठन को अभी हफ्ता भर भी नहीं बीता है और लोगों ने नकारात्मक सोंच अभी से बना लिया है। गुजारिश है कि अपनी सोच को कुछ दिन के लिए उजागर न होने दें क्योंकि अभी ऐसा होने से सरकार की तो नहीं उलटे नकारात्मक टिप्पणी करने वाले विद्वान/समीक्षकों को समाज के हर वर्ग में हंसी का पात्र बनना पड़ सकता है। अन्त में मैं यही कहूँगा कि- बेपर की उड़ाने वालों अपनी छीछालेदर से बचो।
उसी रात में सोशल साइट्स पर पढ़ने को मिला किया डॉ. दिनेश शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और गृह मंत्रालय को लेकर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य में ठन गई है। यही नहीं कई विद्वान, राजनीति के जानकार और पत्रकारिता में महारत हासिल किए हुए महानुभावों ने तो यहाँ तक कह दिया कि उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद को उनके पद से हटा दिया गया। एक ने इस पोस्ट पर जवाब के रूप में वरिष्ठ आई.पी.एस. रजनीकान्त मिश्र की फोटो तक अपलोड कर दी। यह तो रही 19 और 20 मार्च के बीच उड़े तमाम महाज्ञानियों के शिगूफों की बात अब इस समय सोशल मीडिया पर इन्हीं और इन जैसे लोगों द्वारा कहीं सलाटर हाउस बन्दी तो कहीं एन्टी रोमियो स्क्वॉयड को लेकर तरह-तरह की भ्रामक खबरें पोस्ट की जा रही हैं।
मेरा अपना मानना है कि इस तरह के काम को अन्जाम देने वाले थोड़ा सब्र करें और उत्तर प्रदेश में बनी प्रचण्ड बहुमत की लोकप्रिय सरकार को थोड़ा समय दें। फिजूल की भ्रामक सूचनाएँ देकर किसी भी तरह की सनसनी न फैलाएँ। सबका साथ, सबका विकास का नारा देने वाली सरकार जब अपने वादे पर खरा न उतरे तब उसका विरोध करें और उनके इस कार्य में सहभागी के रूप में मुझ जैसे तमाम लोग भी शामिल होंगे। वर्तमान सरकार के गठन को अभी हफ्ता भर भी नहीं बीता है और लोगों ने नकारात्मक सोंच अभी से बना लिया है। गुजारिश है कि अपनी सोच को कुछ दिन के लिए उजागर न होने दें क्योंकि अभी ऐसा होने से सरकार की तो नहीं उलटे नकारात्मक टिप्पणी करने वाले विद्वान/समीक्षकों को समाज के हर वर्ग में हंसी का पात्र बनना पड़ सकता है। अन्त में मैं यही कहूँगा कि- बेपर की उड़ाने वालों अपनी छीछालेदर से बचो।







0 Komentar