आलम खान एडिटर एक युवा होनहार और बेबाक पत्रकार हैं। ऐसा नहीं है कि इस पत्रकार ने नए सी.एम. योगी के बारे में ही लिखा है। जहां तक मुझे मालूम है कि इनकी निगाह हर क्षेत्र पर पड़ती है जो नागवार लगा उसे और जो अच्छा लगा उसे भी लिखने की आदत है। तुम्हारा लेखन जाति, धर्म, संप्रदाय से ऊपर हटकर रहता है। इनकी पोस्ट पर वे ही नकारात्मक सोच रखते हैं जो ‘वाद‘ से ग्रस्त होंगे। जब भी मुझे पता चलता है कि आलम ने अमुक विषय पर लिखा है उसे मैं हर ऐंगिल से देखता हूं। अच्छा लगता है। योगी को संबोधित पोस्ट में जितना कुछ आलम द्वारा लिखा गया है, वह एक संदेश है जिसपर अमल करने हेतु सी.एम. को सोचना चाहिए। वैसे एक लंबे अंतराल उपरान्त मुझमें भी ‘वाद‘ का संक्रमण हो आया है। वह यह कि ‘योगी‘ जिनका असली नाम अजय सिंह है और जाति से क्षत्रिय है।
टी.एन. सिंह, वी.पी.सिंह, वीर बहादुर सिंह और राजनाथ सिंह जो उत्तर प्रदेश के सी.एम. रह चुके हैं वे भी क्षत्रिय जाति के हैं। चाहूंगा कि मेरे इस वर्तमान ‘क्षत्रियवाद‘ को भी थोड़ा समय दिया जाए। आलम तुम्हारी और हमारी कौम ने सैकड़ो-हजारों साल राज किया है। हम दोनों गुलामी का दंश भी झेल चुके हैं और क्रांतिकारी बनकर देश को फिरंगियों की दासता से मुक्ति भी दिलाया है। ऐसे में हम दोनों को किसी भी वाद का मोहताज नहीं होना चाहिए। नकारात्मक सोच रखने वाले लोग शायद ऊपरवाले में आस्था नहीं रखते हैं। तुम एक जहीन नौजवान हो और यह खुशी की बात है कि तेजतर्रार पत्रकार हो लिखो और लिखते रहो।
फिर भी अंत में -
चाहूंगा कि क्षत्रिय जाति के योगी आदित्यनाथ को जांचों, परखों तदुपरांत यदि इनकी कार्यशैली जनहित में न हो तब अपनी लेखनी निरंतर चलाते रहो।
चाहूंगा कि क्षत्रिय जाति के योगी आदित्यनाथ को जांचों, परखों तदुपरांत यदि इनकी कार्यशैली जनहित में न हो तब अपनी लेखनी निरंतर चलाते रहो।
ढेरों शुभकामनाओं के साथ,
तुम्हारा,
भूपेंद्र सिंह गर्गवंशी









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