मेरे यहाँ का बिजली मीटर या बुलेट ट्रेन.....?

इतनी तो अपनी औकात है ही कि एक सेकेण्ड हैण्ड कूलर लगवा कर प्रचण्ड गर्मी में ठण्डी हवा लूँ, लेकिन यह सोच ही सकता हूँ करने की हिम्मत नहीं। आप मित्रों से कुछ ऐसी बातें शेयर करना चाहता हूँ जिसे जानकर आप मेरी मजबूरी बेहतर समझ जाएँगे। मैंने ए.सी. वालों के कक्षों में घुसना छोड़ रखा है कारण यह कि उसमें से निकलने के बाद फिर मुझे अपनी स्टडी में गर्म लू के थपेड़े खाने पड़ेंगे। तब मेरा स्वास्थ्य खराब हो जाएगा। 
डेढ़ वर्ष पूर्व की बात है- मेरे यहाँ के बिजली महकमें ने ‘इलेक्ट्रॉनिक मीटर’ लगवा दिया है। इस मीटर की स्पीड बुलेट ट्रेन की स्पीड से कई गुना अधिक है। गलती मेरी है जो विद्युत कर्मी उक्त मीटर लगा रहा था उसने एक हजार रूपए की डिमाण्ड किया था, मैं तत्समय अर्थाभाव के कारण उसे सौजन्य शुल्क नहीं दे पाया। परिणाम यह हुआ कि जितनी बिजली खपत एक दर्जन घरों में होती है उतना अकेले मेरे यहाँ होने लगी।
पता नहीं क्यों उक्त विद्युत कर्मी ने मेरे यहाँ लगाए गए मीटर में क्या तकनीक फिट कर दिया कि अब खामियाजा भुगत रहा हूँ। एकाध फैन और एल.इ.डी./सी.एफ.एल. का उपयोग होता है और बिल आता है पहाड़ सरीखा। एक गलती और कर दिया था वह यह कि मीटर लगाने वाले विद्युत कर्मी की डिमाण्ड के बारे में उच्चाधिकारी को बता दिया था, शायद यही कारण रहा कि मेरा मीटर शहर के अन्य घरों में लगे मीटर से कई गुना तेज भागता है। पाँच सौ, हजार रूपए विद्युत बिल के स्थान पर ढाई से तीन हजार रूपए प्रतिमाह बिजली का बिल मिलता है। है कोई मेरा हमदर्द जो मेरे यहाँ लगे विद्युत मीटर की जाँच कराकर उसे बदलवा दे.......?

-भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी, 

9454908400

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