ई बुड्ढा लोग अब मरै कै जून फेसबुकिया बनिकै काव कहै चाहथेन। जब उमिरि रही तब एवरेस्ट पर चढ़ेन, समुन्दर में कूद परेन, सरकारी नौकरी किहेन, ओहमन लूट-पाट मचाइ कै घर-दुआर पक्का, झंइया-झार बनवायन। घोड़ा-गाड़ी खरीदेन। अब जब रिटायर होई गयेन तब ई काहें नाय सोचतेन कि चलै कै बेर भय बाय कुछ नीक काम कई डारी। हम तो कहब कि अगर एनके घरे के बगले बंसवारि होय तो एक ठू हरियर बांस सिरिजि लेंय। पेड़-पालव बचा होय तो जरै भरेका झुरान लकड़ी कटवाई के रखि लेंय। फेसबुक पर आपन थोबड़ा और कमेण्ट लिखि कै गवन्नर न बनैं। हे भइया जनम लिहे हया तो मरब्या जरूरै, अब ओकर फिकिर करा। कबहूं केहू कै मदद करे बाट्या कि नाय................. उहै मरे के बाद कामे आये, लोगे याद करिहैं।
एक मसबरा अउर बुढ़ापा में आखीं कै खयाल करा। मोबाइल पर लिखब-पढ़ब छोड़ि द्या। गाँव गिरांव में रहथ्या तो उहां के लोगन का जागरूक करा, शिक्षा कै जोत जलावा। इहै सबसे बड़ा पुन्य कै काम हय, अउ फेसबुक पै आपन बैभव न देखावा कि आज कलकत्ता बाटी, तो बिहान दिल्ली तो परसों मदरास औ नरसों बम्बई। अरे लोगन कां तोहरे करोड़ों, अरबों से का मतलब तूं होब्या। राजा हरिश्चन्दर तो हया नाय। अरे उमिरि कै खयाल करा भइया। नई पीढ़ी किनाय न पगला। ग्लोबल डिजिटलाइजेशन में तौ लड़िका से लैके सयाने के हाथे में भिक्षापात्र स्मारट फोन देखै कां मिलत बाय।
ऐसन तो सायद संसार के बिकसित देसन में भी नाय देखै का मिलत। लकिन धन्य हयन देस कै नेता जवन लोगन का भरमाइ कै इन्टरनेट से जोड़ि कै ओनकै जड़ि काटि दिहेन। हे बुढ़ऊ लोग तूं काहें सनका ह्या जवन फेसबुक कै इस्तेमाल करथ्या। हमैं लागथै कि तोहरे सब बुढ़ापा में मउज-मस्ती लेय खातिर ऊ काव कहथेन हाँ उहै पोरन फिलम देखथ्या। तोहरे सबकै रवइया देखि कै लागथै कि मानसिक रूप से एक दम बिकरित होई गय हया। जब तू देखत हया तव तोहर देखि कै तोहारे नाती-पोता, लड़िका, बिटिया, बेटवा सब उहै करै लगिहैं जवन तू करथया। एक बात बतावा फेसबुक पै जवन लिखि देत्थ्या अउर होहपे जवन कमेन्ट पावथ्या अपने दिल पै हाथ रखिकै कहा कि ऊ लोग जवन तोहरे पोस्ट पै कमेन्ट देथेन का सही में ऊ सब तोहार दोस्त हयन। हम्मैं सरम लागथै।
जब हमार नाती पोतए हमैं बतावथेन कि बाबा फलाने बुढ़ऊ जमुना जी, गोमती जी, गंगा माई नदियन मां नहाथयन और सेल्फी अपलोड केहेहयन। इहै नाय आगरा कै ताजमहल, दिल्ली कै कुतुबमीनार, बम्बई कै चौपाटी, नैनीताल जइसन जगहन कै फोटो खैंचि कै फेसबुक पै लगाये हयन, अउर उनके तथाकथित चाहै वाले मित्र लोग बहुत तारीफ किहे हयन। जा आज एतनै, न सुधरब्या तो फिर लिखब। उप्पर वाला तोहरे सबकां अपने लगे भले ना बोलावै, मुला जब तक यह धरती पै बोझ बना जीयत बाट्या तब तक तौ सद्बुद्धी देय तोहरे सबके लिये इहै कामना करत बाटी।








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