मैं नित्य की भाँति इवनिंग वॉक पर था और एक सरकारी महकमें के कार्यालय के निकट एक चाय की दुकान के बाहर पड़ी बेंच पर अकेले बैठा हुआ था। इसी बीच वह कमीना मेरे पास आ पहुँचा। उसने जो कहा उससे मुझे बड़ा आघात लगा और दिल की भड़ास को लिपिबद्ध करके आप पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूँ।
बीते दिवस की बात है- उस दिन से पूर्व मेरे मन में ऐसा कुछ भी नहीं था जिस तरह लोग उसके बारे में कहते हैं लेकिन आखिरकार वह भ्रम भी दूर हो गया कि वह महाकमीना है। उसके बारे में जितना सुनता रहा हूँ वह सब कम ही कहूँगा। हिन्दू मनुवादी ग्रुप के शीर्ष पर आने वालों में कहलाने वाला वह महान कमीना व्यक्ति है।
शराब का सेवन उसकी आदत है। ठीक है मदिरापान को गलत कहा जा सकता है परन्तु उसके सेवन के लिए पैसों की व्यवस्था में अपना जमीर बेंचा जाए और दूसरों का मुँह देखा जाए यह शायद ठीक नहीं।
वर्षों पूर्व से सुनता आ रहा हूँ कि वह कमीना व्यक्ति शराब के चक्कर में पड़कर अपना दीन धर्म खो चुका है। उसने अपने परिवार को समाज के उस दलदल में धकेला है जिसे घोर पाप कहा जाता है। मसलन- शराब के पैसों के लिए पत्नी और घर की बहू-बेटियों को दूसरों की अंकशायनी बना चुका है। शायद यह कार्य अब भी बदस्तूर जारी है।
मदिरा के नशे में अनाप-शनाप कहना उसकी आदत में शुमार है। एक दूसरे की बुराई करना उसकी जेहनीयत है। अपने बारे में कम दूसरों के प्रति नकारात्मक सोचना उसकी आदत है।
वह इतना झूठा और कमीना है मुझे तब पता चला जब उसने कहा कि अमुक व्यक्ति ने मेरे बारे में ऐसी टिप्पणी की है जिसे मैं अप्रत्याशित मानता हूँ। बड़ा कुत्ता वह कि मैं बस इतना ही जानिए....।
नशे की झोंक में उस कमीने ने जो बात कही थी उसकी पुष्टि के लिए सम्बन्धित से जब बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा कोई कारण ही नहीं बनता कि मैं इस तरह शब्द इस्तेमाल करूँ। हो सकता है कि कहने वाले ने शराब के नशे में हमारे और उनके बीच दरार डालने के लिए ऐसा कहा हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शाम 5 बजे के बाद उक्त व्यक्ति की दुकान में मदिरापान करने वाले उसके मित्रों का जमावड़ा हो जाता है हम लोग जब भी कभी चाय की दुकान के बगल बैठते हैं तो इधर-उधर की राजनीतिक बातें ही करते हैं और लोगों का सुख-दुख जानते हैं।
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी एक वरिष्ठ पत्रकार हैं उन्होंने किसी के बारे में कभी कोई नकारात्मक व आहत करने वाले टिप्पणियाँ नहीं की हैं तब भला ऐसे के बारे में मैं नकारात्मक और बेहूदी टिप्पणी क्यों करूँगा?
मैं सुनी-सुनाई बात पर विश्वास नहीं करता हूँ और न ही शराब का सेवन करता हूँ। मैंने इस आलेख में जो कुछ भी लिखा है वह सब सुनी-सुनाई बातें हैं। यदि यह लिखता न तो दिमाग के अन्दर चल रहे भूचाल से निजात न पाता। इसलिए इसे लिखना पड़ा।
बीते दिवस की बात है- उस दिन से पूर्व मेरे मन में ऐसा कुछ भी नहीं था जिस तरह लोग उसके बारे में कहते हैं लेकिन आखिरकार वह भ्रम भी दूर हो गया कि वह महाकमीना है। उसके बारे में जितना सुनता रहा हूँ वह सब कम ही कहूँगा। हिन्दू मनुवादी ग्रुप के शीर्ष पर आने वालों में कहलाने वाला वह महान कमीना व्यक्ति है।
शराब का सेवन उसकी आदत है। ठीक है मदिरापान को गलत कहा जा सकता है परन्तु उसके सेवन के लिए पैसों की व्यवस्था में अपना जमीर बेंचा जाए और दूसरों का मुँह देखा जाए यह शायद ठीक नहीं।
वर्षों पूर्व से सुनता आ रहा हूँ कि वह कमीना व्यक्ति शराब के चक्कर में पड़कर अपना दीन धर्म खो चुका है। उसने अपने परिवार को समाज के उस दलदल में धकेला है जिसे घोर पाप कहा जाता है। मसलन- शराब के पैसों के लिए पत्नी और घर की बहू-बेटियों को दूसरों की अंकशायनी बना चुका है। शायद यह कार्य अब भी बदस्तूर जारी है।
मदिरा के नशे में अनाप-शनाप कहना उसकी आदत में शुमार है। एक दूसरे की बुराई करना उसकी जेहनीयत है। अपने बारे में कम दूसरों के प्रति नकारात्मक सोचना उसकी आदत है।
वह इतना झूठा और कमीना है मुझे तब पता चला जब उसने कहा कि अमुक व्यक्ति ने मेरे बारे में ऐसी टिप्पणी की है जिसे मैं अप्रत्याशित मानता हूँ। बड़ा कुत्ता वह कि मैं बस इतना ही जानिए....।
नशे की झोंक में उस कमीने ने जो बात कही थी उसकी पुष्टि के लिए सम्बन्धित से जब बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसा कोई कारण ही नहीं बनता कि मैं इस तरह शब्द इस्तेमाल करूँ। हो सकता है कि कहने वाले ने शराब के नशे में हमारे और उनके बीच दरार डालने के लिए ऐसा कहा हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शाम 5 बजे के बाद उक्त व्यक्ति की दुकान में मदिरापान करने वाले उसके मित्रों का जमावड़ा हो जाता है हम लोग जब भी कभी चाय की दुकान के बगल बैठते हैं तो इधर-उधर की राजनीतिक बातें ही करते हैं और लोगों का सुख-दुख जानते हैं।
डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी एक वरिष्ठ पत्रकार हैं उन्होंने किसी के बारे में कभी कोई नकारात्मक व आहत करने वाले टिप्पणियाँ नहीं की हैं तब भला ऐसे के बारे में मैं नकारात्मक और बेहूदी टिप्पणी क्यों करूँगा?
मैं सुनी-सुनाई बात पर विश्वास नहीं करता हूँ और न ही शराब का सेवन करता हूँ। मैंने इस आलेख में जो कुछ भी लिखा है वह सब सुनी-सुनाई बातें हैं। यदि यह लिखता न तो दिमाग के अन्दर चल रहे भूचाल से निजात न पाता। इसलिए इसे लिखना पड़ा।







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