कुत्तों जैसा नाश्ता/भोजन मैं नहीं करता

-भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी/ जानते हैं- यदि नहीं तो आप जरूर जानें मेरी दिनचर्या और खाने-पीने का मेनू। सुबह- सभी कामकाजी सदस्यों और बच्चों के स्कूल जाने के उपरान्त बिस्तर छोड़ता हूँ। 9 बजे के बाद चाय, बिस्कुट, नमकीन और स्लाइस मिलती है। चाय बगैर चीनी, बिस्कुट शुगर फ्री, नमकीन सोनू किराना वाले के यहाँ से खरीदा गया जिसे मुँह में डालते ही चीनी/गुड़ के शीरे/चासनी की आवश्यकता पड़ती है। इतना कड़ुवा/तीखा जिसे मैं नहीं झेल पाता हूँ।
पहले चाय, बिस्कुट, नमकीन और पानी का गिलास फिर काफी देर उपरान्त सूखे गर्म की गई ‘स्लाइस’। जनाब- यदि इन सबको किसी व्यक्ति को मुफ्त में खिलाना चाहूँ तो वह देखते ही मुँह बिचकाकर मुझसे कन्नी काट जाएगा। 11 बजे के उपरान्त लौकी, कद्दू, नेनुआ की सब्जी 4-6 फुल्कियाँ (चपाती) खाना है तो खाओ नहीं तो पेट पर हाथ रखकर तखत पर लेट जावो।
2 बजे के बाद काफी इन्तजार पश्चात एक कप चाय (वह भी बिना चीनी की) सादा पानी पीकर प्रतीक्षा करना आदत बन गई है। 4-5 बजे के बीच 2 चपाती दाल और सब्जी। फ्रिज में रखे-रखे सड़ रही धनिया-टमाटर पर ध्यान क्यों दिया जाए। शाम को कभी-कभार एक कप चाय। 9 बजे के आस-पास 2 चपाती और कुछ भी बना हो अल्प मात्रा में। खावो, पानी पिवो और तकदीर व अपने कर्मों के बारे में सोचते-सोचते सो जावो।
यहाँ बताना जरूरी है कि मुझे मिलने वाले नाश्ते/भोजन को भूखे कुत्ते के सामने यदि रख दिया जाए तो वह भी उधर से मुँह फेर कर चला जाएगा। तात्पर्य यह कि जो मैं खाता हूँ उसे कुत्ता नहीं खा सकता या फिर कुत्तों जैसा नाश्ता/भोजन मैं नहीं करता। मैं कुछ नहीं करता- यदि नवजवान होता तो शायद सभी निकम्मा कहते लेकिन ऊपर वाले ने 65 बसन्त दिखा दिया है तब मुझे जवान भी नहीं कहा जा सकता।
गैस, कब्ज, एसिडिटी, दृष्टिदोष, शुगर (मधुमेह) आदि से पीड़ित। मेडिकल जाँच नहीं कराया है। कारण- बीमारी से नहीं जाँच खर्चे से मर जाता। बहरहाल अभी तक मैं जिन्दा हूँ। कमाने वाले सदस्यों ने अभी तक घर से बाहर निकलने को नहीं कहा है। जिस दिन ऐसी नौबत आ गई, घर छोड़कर कहा जाऊँगा यही सब सोच रहा हूँ। यदि आप कोई स्थान बता देंगे तो मेहरबानी होगी। मुझे आप मित्रों द्वारा सुझाए गए मार्ग का बेसब्री से इन्तजार है। कृपया इसे अन्यथा न लेकर सर्वथा गलत न मानें यह सच है कि मेरा नाश्ता/भोजन कुत्ता नहीं खा सकता।

 -भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी

9454908400 

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